गांवों में नाले का पानी पी रहा ‘भारत’!

हमारे देश में में मूलभूत समस्या की ओर कभी किसी का ध्यान गया ही नहीं, खासकर गांव की तरफ आज भी कई गांवों में पेयजल संकट गहराया हुआ है, लेकिन कभी किसी ने इन समस्याओं के स्थायी समाधान की कोशिश कभी नहीं की। वर्तमान दौर कोरोना का चल रहा है, ऐसे में लाजिमी है कि अगर कोई समस्या सामने आती है तो उसे इस महामारी की आड़ लेकर टाल दिया जाएगा।  पेयजल संकट से जुड़ी एक तस्वीर झारखंड के गांव की सामने आई...। ये तस्वीर मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाली है...। झारखंड के पूूर्वी सिंहभूम के घाटशिला अनुमंडल में प्रखंड कार्यालय से करीबन 30 किलोमीटर दूर घुटिया सबर बस्ती की है, जहां रहने वाले परिवार नाले का पानी पीने पर मजबूर हैं।  जिस तरह मध्यप्रदेश में मालवा के लोगों के मां नर्मदा जीवनदायनी है, ठीक झारखंड के इस गांव में बस रहे ग्रामीणों के लिए जीवनदायनी यह नाला है, जिसका पानी पीने से लेकर घर में वापरने, कपड़े धोने के लिए किया जाता है। ये हकीकत सिर्फ झारखंड के एक गांव की नहीं है, बल्कि हमारे देश के कई ग्रामीण क्षेत्रों की हैं, जहां साफ-सुथरा पीने का पानी ग्रामीणों को नसीब ही नहीं होता। एक तरफ कहा जाता है कि भारत गांवों में बसता है, लेकिन गांवों में बसने वाले भारत की तरफ कभी किसी का ध्यान नहीं जाता और ग्रामीण पूरा जीवन संघर्ष में बीता देता है। सरकार को शहरों के साथ-साथ गांवों पर भी ध्यान देना चाहिए..., जिस तरह मोबाइल को गांव-गांव पहुंचा दिया है, ठीक उसी तरह सबसे जरूरी और अहम है पेयजल जिसके लिए चिंतन जरूरी है, नहीं तो भारत गांवों में बसता है, कहना बेमानी होगा...।


जगजीत सिंह भाटिया
प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र