चिंतकों की चिंता समझ से परे...!

 



जगजीत सिंह भाटिया

प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र

आज ये बात तो सच साबित हो गई कि जहां चुनाव होंगे वहां बिल्कुल कोरोना नहीं फैलेगा। मध्यप्रदेश के दमोह में भी कुछ ऐसे ही ‘दिलखुश’ नजारे देखने को मिले। नेताओं के कहने पर ही कोरोना आमद दे रहा है। आह्वान कर लोगों को घर से निकाला जा रहा है कि भारी संख्या में मत देकर पार्टी को विजयी बनाना है। दमोह में किसी प्रकार की कोई पाबंदी नहीं है। मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के नियम यहां तो लागू ही नहीं हो रहे हैं।  जनता तो बेबस है, कानून से लड़ नहीं सकती। जिसने जैसा कह दिया वैसे ही चलना है। पूरा सप्ताह मध्यप्रदेश में चीत्कार में बीता, क्योंकि कोरोना से मरने वालों की संख्या बढ़ रही है। पूरे प्रदेश में आॅक्सीजन लेवल बढ़ाने वाले इंजेक्शन रेमडेसिविर की कमी से सैकड़ों लोगों की जान चली गई।

इंदौर में दवा बाजार में सुबह से लेकर रात तक मरीजों के परिजन की कतारें लगी रही। कालाबाजारी के आरोप-प्रत्यारोप के बीच फिर एक बैठक शहर के चिंतकों ने की और कहा कि ये इंजेक्शन गंभीर मरीजों के लिए हैं, अनावश्यक भीड़ न लगाए...। चिंतक कह रहे हैं कि अनावश्यक भीड़ न लगाए..., क्या लोगों को मजा आ रहा है कि वो भरी गर्मी में अपनों की जान बचाने के लिए भटक रहे हैं और मनचाही कीमत देकर इंजेक्शन खरीद रहे हैं। चिंतकों ने बैठक तो कर ली, लेकिन अस्पताल वालों को ये नहीं कहा कि आप बेवजह क्यों रेमडेसिविर इंजेक्शन लिख रहे हो। जब अस्पतालों से ही इस इंजेक्शन के लिए लिखा जा रहा है तभी तो भीड़ बढ़ रही है। ऐसे ली सीटी स्कैन को लेकर भी है, लेकिन ये बुद्धिजीवी बैठकें कर लोगों को ध्यान भटका रहे हैं। जहां आदेश देना चाहिए, जहां व्यवस्था सुधारना चाहिए, वहां ध्यान नहीं दे रहे हैं। बैठक के दौरान चिंतकों ने कहा कि ज्यादातर छोटे अस्पतालों में बीएमएस डॉक्टर मरीजों को देख रहे हैं, जिन्हें ये जानकारी नहीं है कि रेमडेसिविर इंजेक्शन किन परिस्थितियों में लगाना जरूरी है।   साधारण मरीज को नहीं लगाया जा सकता, फिर भी छोटे अस्पताल हर भर्ती मरीज को रेमडेसिविर लाने के लिए कह रहे हैं।  हालात बिगड़ेने के बाद इस तरह की बैठक आयोजित कर लोगों का ध्यान डायवर्ट ही किया जा रहा है। जहां से गलती हो रही है, उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।