शर्मसार करती घटनाएं...

 


जगजीत सिंह भाटिया

प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र


27 दिन पहले 8 मार्च को पूरे देश में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। कसमें खाई गई, संकल्प लिया गया कि महिलाओं और युवतियों और बच्चियों पर कोई आंच नहीं आने देंगे, लेकिन ये संकल्प हमेशा की तरह एक ही दिन के लिए लिया जाता है, बाकि 364 दिन महिलाओं के साथ अत्याचार की घटनाएं प्रकाशित होती रहती है। कुछ दिन पहले जबलपुर के लार्डगंज क्षेत्र के संजय नगर में मामूली कहासुनी के बाद पड़ोसियों ने एक युवती पर तलवार से हमला कर दिया और उसकी आंख फोड़ दी। कारण ये रहा कि संजय नगर में रहने वाले युवक ने अपने दोस्तों को घर बुलाया और होली खेल रहे थे। इस दौरान युवक गाली-गलौज कर रहे थे। इस पर लड़की के पिता और लड़की ने ऐसा नहीं करने के लिए कहा तो युवकों ने तैश में आकर युवती की आंख, नाक और सिर पर तलवार और डंडे से हमला कर दिया। लड़की को दिखना बंद हो गया है। ठीक इसी तरह की मारपीट की घटना इटावा में हुई। यहां थाना भरथना क्षेत्र के जय पैलेस के पास छात्राओं को छेड़खानी का विरोध करना भारी पड़ गया। दबंगों ने हॉकी और रॉड से छात्राओं पर हमला कर दिया। घायल अवस्था में छात्राओं ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया। इन दुखद घटनाओं से समझा जा सकता है कि वास्तव में महिलाओं के प्रति पुरुषों में हमदर्दी नहीं रही। गलती युवक करें और सजा महिलाओं को ही दी जाती रही है। कुछ दिन पहले ही मध्यप्रदेश के सभी जिलों में 700 थानों में ऊर्जा महिला हेल्प डेस्क स्थापित की है, जहां महिलाओं पर होने वाले अपराधों में त्वरित मदद पहुंचाई जाएगी। प्रदेश सरकार तमाम कोशिशें कर रही है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध न घटित हो, लेकिन मामले घटने के बजाए बढ़ते जा रहे हैं। छेड़खानी की घटनाएं भी बढ़ रही है।  हमारे देश में नारी को देवी के समान पूजा जाता है, लेकिन इसी देश में उनके साथ दर्दनाक और शर्मनाक हरकत की जा रही है। देश का समाज पुरुष प्रधान है। सिर्फ कहा जाता है कि नारी को पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहिए, लेकिन हकीकत ठीक उसके उलट है। महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा समाज के लिए ही नुकसानदायक है। कम उम्र की लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं भी बढ़ रही है। महिलाओं को गलत सोच से देखने वाले कुछ गंदी मानसिकता रखने वाले पुरुष समाज में रहते है। ऐसे पुरुष महिलाओं को कमजोर समझते है और उनका सम्मान नहीं करते है। फिर मौका पाकर इस तरीके के लोग अपने नापाक इरादों को अंजाम देते है। यह एक गंभीर समस्या हैं। साथ ही घरेलू हिंसा के मामले भी काफी बढ़ रहे हैं।  महिलाओं को इतना पीटा जाता है कि वह अस्पताल पहुँच जाती है। अपने परिवार के लिए कुछ महिलाएं यह चुपचाप सहन करती है। अंत में इसके गंभीर परिणाम देखने को मिलते है। नारी सम्मान की बात करने वाले असामाजिक तत्वों को सुधारने की ओर पहल करना भी बहुत जरूरी है। नहीं तो हर दिन कोई न कोई महिला इनके हाथ पीटती रहेगी और समाज सिर्फ एक दिन का संकल्प लेकर सब कुछ भूलता ही रहेगा।