साहब की गाड़ी फंसी तब समझ में आया इंदौर का ट्रैफिक कितना कष्टदायक है!

 


 जगजीत सिंह भाटिया
प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र



इंदौर के नए डीआईजी शहर के ट्रैफिक का हाल जानने सड़क पर उतरे थे, जब उनके वाहन के पहिये जाम में फंस गए तब उन्हें पता चला कि इंदौर का ट्रैफिक जनता के लिए कितना कष्टादायक है। ट्रैफिक विभाग के जिम्मेदारों को ये बात पता होनी चाहिए कि यातायात सप्ताह या महीना मनाने से इंदौर का ट्रैफिक कभी भी नहीं सुधरने वाला है, क्योंकि ट्रैफिक के जवानों में कर्त्तव्यपरायण होने की बहुत आवश्यकता है, जो उनमें कहीं भी दिखाई नहीं देती। खासकर सुबह और शाम को जब ट्रैफिक अधिक होता है, तब जवान लगभग नदारद ही रहते हैं चौराहों से। ऐसा कोई पहली बार प्रकाशित नहीं हो रहा है। वहीं, बरसों से आलस्य ट्रैफिक जवानों की दिनचर्या में शामिल हो चुका है। कुछेक चौराहों को छोड़ दिया जाए तो शेष चौराहे भगवान के भरोसे ही हैं। वाहन चालकों में धैर्य बिल्कुल नहीं रहा। वहीं, सबसे बड़ी त्रासदी दुकानदारों के कारण शहर को झेलना पड़ रही है। व्यापारी दुकानों का सामान सड़क पर रखने लगे हैं। अब मांग उठने लगी है कि कोरोनाकाल के बाद शहर में बड़ी संख्या में ठेलेवाले, ई-रिक्शा सहित अन्य लोडिंग वाहनों पर सड़क पर व्यापार होने लगा है, जिससे जाम की स्थिति बनती है, तो इन पर सख्ती होनी चाहिए। क्या ट्रैफिक बाधित करने के लिए ये फुटपाथ पर व्यापार करने वाले लोग ही जिम्मेदार है। कोई भी काम इच्छाशक्ति के बगैर कभी नहीं होता। जिस प्रोजेक्ट पर करोड़ों रुपए खर्च किए (बीआरटीएस) क्या उसे कोई सक्सेस के तौर पर देखता है...?
रिंग रोड और बायपास पर हालात रोज बिगड़ते हैं, क्यों? क्या कभी किसी जिम्मेदार ने इस तरफ ध्यान दिया।  ट्रैफिक को लेकर इंदौर की इंजीनियरिंग पूरी तरह फैल है, क्योंकि इंदौर शहर का ट्रैफिक सुधारना हो तो सिर्फ पुलिस सख्ती ही काम आ सकती है...और वह तब जब ये ट्रैफिककर्मी लेन-देन छोड़ दे तो..., नहीं तो इंदौर का ट्रैफिक कभी सुधरने वाला नहीं है...। इन दिनों हर चौराहे पर यातायात के नियमों का पालन करने के पोस्टर-बैनर लगे हैं, क्या उसके अनुसार नियमों का पालन किया जा रहा है। हेलमेट को लेकर यमराज की समझाइश देने वाला पोस्टर कितना कारगर हो रहा है, ये सब जानते हैं। डीआईजी साहब को अगर शहर के ट्रैफिक की वाकई में चिंता है तो सबसे पहले यातायातकर्मियों को सख्त होने की हिदायत देनी होगी कि वो वाहन चालक का चालान काटे बगैर नहीं छोड़े और वाहन जब्त कर कोर्ट से ही छुड़वाने वाली कार्रवाई करें, तब जाकर बेपरवाह वाहन चालकों पर अंकुश लग सकेगा...।