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फिर महीनेभर चलेगी नौटंकी...क्योंकि यातायात सुधारना है...

 

 

जगजीत सिंह भाटिया
प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र


नए साल की शुरुआती महीने जनवरी के आखिरी दिनों में फिर एक बार सड़क सुरक्षा माह (32वें) का आगाज हुआ है। थीम है जीवन रक्षा। इस अभियान के तहत लोगों को और विद्यार्थियों को यातायात के नियमों का पाठ पढ़ाया जाएगा। अच्छा भी है, क्योंकि कम से कम लोगों में जागरूकता तो आए...। इस अभियान का असर कितना हो रहा है, इस पर बचे 11 महीनों में किसी का ध्यान नहीं जाता। केवल एक महीने तक अपडेट रहने वाले यातायात विभाग के पुलिसकर्मी बचे 11 महीनों में सिर्फ मस्ती छानते रहते हैं। सारे नियम-कायदे सिर्फ जनता के लिए रहते हैं।
...क्या कभी कोई अफसर वास्तव में शहर के चौराहों पर जाकर हालात देखता है। सिर्फ सीसीटीवी कैमरों पर ट्रैफिक का दबाव देखकर शहर के हालात को नहीं समझा जा सकता। एक चौराहे का उदाहरण देखिए पाटनीपुरा चौराहे पर करीब 5 दिन से सिग्नल बंद है, यातायात सुबह से लेकर रात तक भगवान भरोसे चल रहा है। ट्रैफिक उलझता रहता है, लेकिन चौराहे के दो अलग-अलग दुकान के कोने में बैठे जवान को इसकी कोई फिक्र नहीं। एक जवान मंदिर की छांव में बैठा रहता है, तो दूसरा पूरे दिन पेपर पढ़ता रहता है। क्या ये सीसीटीवी कैमरों में नजर नहीं आता। यह केवल पाटनीपुरा चौराहे की बात नहीं है। लगभग हर चौराहे पर ट्रैफिक जवानों को लापरवाही बरतते हुए देखा जा सकता है। वहीं, अब एक माह तक इन्हें और मजे मारने के लिए समय मिल गया है, क्योंकि ट्रैफिक संभालने के लिए इस महीने इनके साथ कोई न कोई सामाजिक संगठन खड़ा हो ही जाएगा। एनसीसी वाले छात्र, विद्यार्थी सब अपना कीमती वक्त इनके लिए जाया करेंगे और ये जवान आराम से पूरे माह एक कोना संभाले आपको दिखाई दे जाएंगे।
पहले घर के हालात सुधारो...
यातायात विभाग के आला अफसरों को पहले अपने विभाग को सुधारना होगा। बीआरटीएस के किसी भी चौराहे पर नियमों का पालन पूरे साल नहीं होता। दो पहिया वाहन चालकों में तो सब्र है ही नहीं, रेड सिग्नल होने पर थोड़ी देर के लिए खड़े रहते हैं और जैसे ही सड़क खाली दिखी वाहन की गति को बढ़ाकर निकाल ले जाते हैं। सिग्नल के भरोसे शहर के चौराहों को छोड़ देना उचित नहीं है। हर चौराहे पर ट्रैफिक जवानों की ड्यूटी लगी होनी चाहिए। वहीं, जनता से भी अपील है कि ट्रैफिक के नियमों का पालन करें और यातायात व्यवस्था में मदद करें। ...और यदि कोई ट्रैफिककर्मी लोगों से वसूली करता दिखे तो मोबाइल पर उसका वीडियो बनाए और सार्वजनिक करें साथ ही अधिकारियों तक भी पहुंचाए या मीडिया को दे, ताकि  इनकी गंदी आदत में भी सुधार हो।