सुशासन की खातिर रिश्वतखोरों पर कब होगी ‘मेहरबानी’

 


 जगजीत सिंह भाटिया
प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र


मध्यप्रदेश में सुशासन की कल्पना लेकर आगे बढ़ रही शिवराज सरकार ने कमर कस ली है कि पूरे प्रदेश में गुंडों और भूमाफियाओं और मिलावटखोर सहित ड्रग्स बेचने वालों को नेस्तनाबूद कर देगी..., और ऐसा कर भी रही है। प्रदेश सरकार का सख्त होना लाजमी है, क्योंकि गुंडे-बदमाश लोगों को परेशान करते हैं, वसूली करते हैं और तमाम असामाजिक गतिविधियां कर समाज को दूषित ही करते हैं, जैसा कि मिलावटखोर खाद्य सामग्री में मिलावट कर पूरी मानवता के लिए खतरा पैदा करते है। वहीं, जिस तरह से प्रदेश सरकार लोगों में विश्वास कायम कर रही है... तो क्यों नहीं इस विश्वास को हमेशा के लिए कायम किया जाता और प्रदेश की जनता को सुशासन क्या होता है, इसकी परिभाषा बताई जाती।  प्रदेश में हर बार मांग उठती आई है कि लालफीताशाही ही भ्रष्ट तंत्र को जन्म दे रही है। ...फिर इन कथित भ्रष्ट अफसरों पर कब प्रदेश सरकार ‘मेहरबानी’ करेगी, क्योंकि प्रदेश में कथित रिश्वतखोर अफसरों की पूरी फौज सुशासन के खिलाफ काम कर रही है। उनका ध्यान सिर्फ इस ओर है कि कैसे रिश्वत का ग्राफ बढ़ाया जाए। समय-समय पर कई रिश्वतखोरों की कॉलर पर लोकायुक्त ने हाथ डाला है, लेकिन ऐसे अफसरों का विभाग बदल दिया जाता है, या कुछ दिनों का निलंबन। ऐसे भ्रष्टाचारियों के मकान क्यों नहीं तोड़े जाते या इनकी संपत्ति क्यों नहीं राजसात की जाती, क्योंकि ये भी समाज के ही दुश्मन है। कुछ दिन पहले ही प्रदेश सरकार की तरफ से आवाज बुलंद की गई थी कि रिश्वतखोर अफसर बाज आ जाए या तो वो इस्तीफा दे दे या फिर सुधर जाए, लेकिन शायद इस बात का असर रिश्वतखोरों पर होता दिखाई नहीं दे रहा है। जब तक ऐसे अफसरों के घरों कोे जमींदोंज नहीं किया जाता, तब तक प्रदेश की जनता को सुशासन की परिभाषा समझ में नहीं आएगी और न ही प्रदेश में सुशासन आएगा। जनता गुंडों और बदमाशों से तो बच जाएगी, लेकिन इन रिश्वतखोरों से कैसे बच पाएगी, क्योंकि ये रिश्वतखोर अफसर खुद सरकार चलाने का दंभ भरते आए हैं तो इन पर कानून का चाबूक कौन फटकारेगा...जिस तरह गुंडों में खौफ है कि जरा-सी गलती उनके घर-परिवार को बे-घर कर देगी... यह डर रिश्वतखोर अफसरों में भी होना चाहिए, उसके लिए एक कार्रवाई होना जरूरी है। अगर प्रदेश में रिश्वतखोर का सरकार ने मकान जमींदोज कर दिया तो जनता खुद कहेगी कि अब प्रदेश में सुशासन आ गया है, नहीं तो सुशासन सिर्फ शब्द बनकर रह जाएगा। जिस तरह से सरकारी अफसरों को गुंडों और बदमाशों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए फ्री हैंड दे रखा है, ठीक उसी तरह ये जिम्मेदारी भी नगर निगम को ही दे देना चाहिए, कि जैसे ही रिश्वतखोर पकड़ा जाए, त्वरित उसके घर के सामने जेसीबी खड़ी की जाए और नेस्तनाबूत कर दिया उसकी भ्रष्टाचार की कमाई से बनाए गए मकान को, तब जाकर प्रदेश की जनता को राहत मिलेगी...।