बचने-बचाने का खेल बरसों पुराना...


 जगजीत सिंह भाटिया

प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र


कानून के रखवाले कैसे नियमों से खेलते हैं, इसकी एक बानगी उज्जैन की देखने को मिली.., साथी को बचाने के खेल में वर्दीधारी जवान ने ऐसा खेले खेला कि उसका साथी बच जाए, लेकिन ऐसा हो न सका। वाकया ऐसा है कि पुलिस भर्ती की तैयारी कर युवती से दुष्कर्म किया गया था। आरोपी ने खुद को बचाने के लिए नीलगंगा थाने में पदस्थ एक जवान और महिला थाने के आरक्षक को साथ मिलाया और ब्लैड सैंपल बदलवाने का षड््यंत्र रचा। उन्होंने डीएनए जांच में आरोपी की जगह स्पर्म और ब्लड का नमूना देने के लिए आरोपी के रिश्तेदार को चुना। वो तो मामले की पोल इसलिए खुल गई की महिला सब इंस्पेक्टर आरोपी को पहचानती थी, और ब्लड सैंपल देने वाला कोई और था। 

मामला उन्हेल इलाके का है। यहां के न्यू अशोक नगर में एक युवती किराए के मकान में रहकर सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रही है। लड़की की दोस्ती पड़ोस में रहने वाले कॉन्स्टेबल अजय अस्तेय से हुई। उसने युवती को शादी का सब्जबाग दिखाया और 3 साल तक उसका शोषण करता रहा। 4 दिसंबर को युवती को अजय की सगाई किसी अन्य लड़की से होने का पता चला तो कॉन्स्टेबल के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज करा दिया। केस दर्ज होने के कुछ ही घंटे बाद अजय को नागझिरी में शादी समारोह से लौटते समय गिरफ्तार कर लिया था।

जिस तरह से हम फिल्मों में देखते हैं, ठीक उसी तर्ज पर पुलिस अब काम करने लगी है। अपराधियों को बचाने के खेल ही इन दिनों थानों पर चल रहे हैं। चाहे उज्जैन हो या इंदौर या प्रदेश सभी जगह सिर्फ सौदेबाजी चल रही है।  अभी हाल ही में इंदौर में आईजी ने सख्ती दिखाई और दो टीआई को लाइन अटैच तक कर दिया। मामला सिर्फ काम में लापरवाही बरतने का ही नहीं है, कुछ और भी है। जिन थाना प्रभारियों पर कार्रवाई की गई है, उस थाना क्षेत्र में उगाही की काफी शिकायतें हैं। पुलिस पर से लोगों का उठता भरोसा भी इसी बात का प्रमाण है कि पुलिस जनता की न होकर अपराधियों की तरफदारी करती नजर आती है। पीड़ितों को धमकाया जाता है कि अगर दुश्मन की तो परेशानी आपको ही भुगतना होगी, इनकी तो रोज की आदत है। बचने-बचाने का खेल थानों पर बरसों से होता आ रहा है, चाहे गुंडों को बचाने वाली बात हो या ‘अपनों’ को।