तनाव और विवाद बनते हैं मौत का कारण...


जगजीत सिंह भाटिया
प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र


छत्तीसढ़ में 55 वर्षीय महिला जज कांता मार्टिन ने सुसाइड कर लिया। वहीं, राजनांदगांव में बिजनेस के लिए पिता ने रुपए नहीं तो बेटे ने फांसी लगा ली और बेटे के गम में पिता ने रेलवे ट्रैक पर कूदकर आत्महत्या कर ली। तीनों मामलों में तनाव और विवाद के कारण जान देना सामने आया। तनाव का कारण अकेलापन रहता है, जिसका परिणाम हमेशा ही मौत के रूप में सामने आता रहा है।


तनाव के कारण ऐसी घटनाएं नहीं हो इसके लिए बोहरा समाज के लोगों ने एक अभियान चला रखा है। इसके चलते वे अपने बुजुर्गों को समय-समय पर घूमाने-फिराने ले जाते हैं। कभी गार्डन में तो कभी पिकनिक स्थल पर। इसके अलावा बुजुर्गों से हल्का-फुल्का व्यायाम कराते हैं। उनके पसंदीदा खेल के भी आयोजन समय-समय पर होते रहते हैं।


इसका असर ये होने लगा कि घर पर जो बुुजुर्ग बैठे हैं उनके स्वास्थ्य में परिवर्तन आया और धीरे-धीरे तनाव का माहौल खत्म होने लगा। जज कांता मार्टिन अकेलेपन का शिकार हुई और जीवन दांव पर लगा दिया। महिला के पति की डेढ़ साल पहले मौत हो चुकी है वहीं दो बेटे हैं एक रायपुर और दूसरा दिल्ली में रहता है। 


राजनांदगांव की घटना बहुत दुखद है कि पिता-पुत्र में विवाद रुपयों को लेकर हुआ। पिता ने अपने 35 वर्षीय बेटे को बिजनेस के लिए रुपए दिए थे, लेकिन बेटे का कारोबार नहीं चला और वह पिता से और रुपए मांग रहा था। पिता ने रुपये देने से मना किया और पास रखी पूंजी को बैंक में डिपॉजिट करा दी। बेटा इस बात से नाराज हुआ और फांसी लगा ली। वहीं पिता ने इसी गम में रेलवे ट्रैक पर ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली।


जिन रुपयों के नुकसान को लेकर पिता ने बेटे को गंवाया और बाद में खुद ही ने जान दे दी तो अब जो लोग परिवार में इनके आसरे थे, उनका तो सबकुछ उजड़ गया। अब वह रुपया किस काम का जिसके लिए दोनों को जान गंवाना पड़ी। जिस तरह बोहरा समाज में बुजुर्गों को लेकर जन-जागृति आई है, ठीक  इसी तरह हर समाज जागरूक हो जाएं और ग्रुप बनाकर हर रविवार अपने बुजुर्गों को कहीं सैर कराने तो कहीं पिकनिक या धार्मिक स्थलों पर ले जाए और अंताक्षरी सहित तमाम ऐसे गेम्स उनकी पसंद के खिलाए तो उन्हें अच्छा लगेगा..., कुछ बुजुर्ग घर में रहते-रहते अपने मित्रों तक को भूल जाते हैं। जब वह आपस में मिलेंगे तो एक-दूसरे के साथ बिताई यादों और बातों से उनका मन हल्का होगा और ये हमारे बुजुर्गों की धरोहर आपके साथ लंबे समय तक बनी रहेगी..।