पांच दिन तक एक दीपक संकल्प का प्रज्ज्वलित कर स्वस्थ समाज निर्माण करने की ले शपथ...


जगजीत सिंह भाटिया
प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र



साल 2020 शायद ही कोई भूल सकेगा...। यह साल हर किसी के लिए मुसीबत लेकर आया.., देश क्या और परदेश क्या..., सभी के हालात बिगड़े.., कई जगह जिंदगी के लिए इंसानियत जिंदा रही तो कई जगह पैसों के लिए इंसानियत का गला घोट दिया गया..। खैर, देर-सवेर.. जीवन पटरी पर लौट आया...।  इस साल लोगों ने कोई भी त्योहार नहीं मनाया.., होली, राखी, गणेशोत्सव, नवदुर्गोत्सव और ईद सहित सभी धर्मों के पर्व सूने निकल गए...। लोगों के मन में डर सता रहा था कि क्या कोरोना का असर दीपावली पर भी पड़ेगा.., लेकिन कालचक्र ने लोगों की भावना को समझा और लोग एक खौफ से निकलकर बाहर आए। सरकारी आंकड़ें बता रहे हैं कि कोरोना का असर अब कम हो रहा है..., सभी चाहते हैं कि यह महामारी खत्म हो..., इसी आशा और उल्लास के साथ लोग सारे गम भूलाकर दीपावली का महापर्व परिवार के साथ मनाने में लग गए हैं। 8 माह के कोरोना काल के बाद छाया बाजारों का सन्नाटा अब काफूर हो चला है..., जिस प्रकार अमावस्या की रात में दीप प्रज्ज्वलित कर उजियारा किया जाता है, ठीक उसी प्रकार हर व्यक्ति यह चाहता है कि वह खुश रहे और दीपक की लौ की तरह उसके घर-परिवार में खुशियां नाचती रहे। 


ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय।।  
अर्थात् हम असत्य से सत्य की ओर चले। अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का पुरुषार्थ करें। मृत्यु से अमरता की ओर चलें। मरने वाली देह को सत्य मानने की भूल त्याग दें। असत्य से ऊपर उठकर अपने सत्य, साक्षी स्वरूप में आएं।
पांच दिन तक दीपावली मनाई जाती है और पूरा घर-आंगन रोशनी से सराबोर रहता है। फिर भी एक दीपक पांच दिन तक रोज रात को इस संकल्प के साथ प्रज्ज्वलित करें कि हमें सत्य की ओर चलना है, भ्रष्टाचार को मन से निकालना है और एक स्वस्थ और सच्चे समाज का निर्माण करना है...।