घबराहट...

 

 

 

 

 

 

 जगजीत सिंह भाटिया
प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र

 
जितना डर लोगों को कोरोना से नहीं लग रहा है, उतना डर सरकार की गाइडलाइन से लग रहा है। हर तरफ असमंजस का माहौल है। 25 तारीख को देवउठनी ग्यारस पर हजारों शादियां है, जिनकी शादियां नहीं निकल रही थी, उन्होंने भी इस मुहूर्त में लगे हाथ फेरे ले लेना ही उचित समझा और जैसे ही चुनाव-दिवाली जैसे उत्सव खत्म हुए तो कोरोना के जादुई आंकड़ों में शेयर मार्केट जैसा उछाल आने लगा। शेयर मार्केट तो कभी-कभार गोता लगा ही लेता है, लेकिन कोरोना के संक्रमितों का आंकड़ा मौका देखकर ही गोता लगाता है...और लगाया ही है, क्योंकि संक्रमितों का आंकड़ा भी घटाना-बढ़ाना प्रशासनिक व्यवस्था का ही एक हिस्सा है। जांचें कम हुई तो संख्या कम और अधिक हुई तो आंकड़ा बढ़ने में देर नहीं लगती...। इन तीन-चार दिनों में लोगों में घबराहट अचानक बढ़ गई है। प्रशासन ने तो गाइडलाइन जारी कर दी, लेकिन जिन्होंने सगे-संबंधियों को न्योता दे दिया है, उनके लिए तो करो या मरो वाली स्थिति है। लोग बड़े खुश थे कि सभी ईष्ट मित्रों और रिश्तेदारों को बेटी-बेटे की शादी में जिमाएंगे.... और उन्होंने सारी व्यवस्था की, लेकिन अब  क्या करें और क्या न करें जैसी स्थिति बन गई है। डीजे वाले पर प्रतिबंध लगा दिया है, लोगों की संख्या सीमित कर दी है... ऊपर से समय का बंधन। जनता बेचारी जिसमें कानून का डर हमेशा बना रहता है...और वह इन नियमों का पालन भी कर जैसे-तैसे विवाह की रस्म पूरी कर लेंगे...। लेकिन हर किसी के मन में सवाल है कि राजनेताओं और सरकारी तंत्र ने उपचुनाव करा लिए..., हजारों की भीड़ जुटाई, कलशयात्राएं निकाली, तब कोरोना नहीं फैला, मगर चुनाव निपटते ही संक्रमण आश्चर्यजनक तरीके से बढ़ने लगा... दीपावली को भी इसका कारण बताया जा रहा है।  कोरोना संक्रमण बढ़ने के चलते इंदौर सहित 5 शहरों में रात्रिकालीन कर्फ्यू लगा दिया..., ये बात भी लोगों के गले नहीं उतर रही है। जब चुनावों में हजारों की भीड़ उमड़ रही थी तब कोरोना संक्रमण की चिंता नेताओं को नहीं हुई... तब अदालती फटकार भी बेअसर रही और सुप्रीम कोर्ट जाकर आदेश भी ले आये और सभाएं जारी रही...कठपुतली चुनाव आयोग भी खामोश बैठा रहा... इसी का परिणाम है कि अब संक्रमण बढ़ने लगा, जिसका खामियाजा जनता से लेकर फिर व्यापारियों को भुगतना पड़ेगा... नेताओं ने तो चुनाव से सत्ता हासिल कर ली और जनता को शादी सहित अन्य आयोजनों में प्रतिबंध झेलना पड़ रहे है... तमाम परिवारों ने होटलों, गार्डनों में बुकिंग कर ली और एडवांस रुपए चुका दिए... निमंत्रण पत्र भी बंट गए.. अब वे क्या करें..? जिस घर में भी शादी है.., वहां घबराहट बढ़ गई है...।