पलासिया गिटार चौराहा भगवान भरोसे... ट्रैफिक पुलिस रहती है नदारद

जवाबदेही.इंदौर
ट्रैफिक पुलिस लाख दावे करे कि उनकी व्यवस्ता चुस्त-दुरुस्त है, लेकिन हकीकत में ऐसा दिखाई नहीं देता। गिटारवाले चौराहे पर अक्सर ट्रैफिक जवान नदारद रहता है और वाहन चालक खुलेआम नियमों को ताक में रखकर वाहन फर्राटे से यहां से निकालते हैं। 

साकेत नगर की तरफ से, कनाड़िया की तरफ से या फिर आनंद बाजार की तरफ से गिटारवाले चौराहे तक पहुंचने के लिए वाहन चालकों, खासकर चार पहिया वाहन वालों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

 साकेत चौराहे से थोड़ी दूर जाने पर सबसे ज्यादा परेशानी कैलाश ग्रेटर अस्पताल के सामने आती है। यहां सड़क पर ही दो पहिया वाहन खड़े कर दिए जाते हैं। वहीं पास ही रिक्शा चालकों ने खुद ही अपनी मर्जी से रिक्शा स्टैंड बना लिया है और सड़क पर रिक्शा खड़े कर देते हैं। इसके अलावा जो मरीज के परिजन है, वो कार को सड़क पर खड़ा कर देते हैं और अस्पताल में चले जाते हैं। इस वजह से यहां ट्रैफिक प्रतिनिधि सुबह से लेकर रात तक बाधित होता है और जाम की स्थिति बन जाती है। खास बात यह कि कैलाश ग्रेटर अस्पताल के समीप पुलिस थाना भी है, लेकिन अस्पताल वालों के खिलाफ क्यों नहीं कार्रवाई की जाती, समझ से परे हैं। अस्पताल की पार्किंग कहीं नजर नहीं आती। यहां आने वाले दो पहिया वाहन चालक आसपास की गलियों में वाहन खड़े कर देते हैं, जिससे गलियों से भी ट्रैफिक रेंगकर निकलता है।

जवानों का नदारद रहना सबसे बड़ी मुसीबत

गिटारवाले चौराहे पर अक्सर जवान नदारद रहते हैं। इससे ट्रैफिक की व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाता। इस चौराहे से लेकर साकेत चौराहे तक को स्मार्ट बनाने के लिए जिला प्रशासन और नगर निगम करोड़ों रुपए फूंक चुका है, लेकिन ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर उदासीनता बरकरार है। 

फुटपाथ पर चलने के लिए तो व्यवस्था चकाचक करा दी है, लेकिन सड़क पर दौड़ने वाले वाहनों की स्पीड पर ब्रेक ट्रैफिक जवानों की वजह से लग रहा है, जो यातायात व्यवस्था संभालने में नाकामयाब हो रहे हैं।