अफसोस...


जगजीत सिंह भाटिया
प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र



बड़ा अफसोस होता है कि जनता आखिर किससे शिकायत करें...। भ्रष्ट हो चुकी लालफीताशाही की कीमत आम लोगों ही उठाना पड़ रही है। भ्रष्टाचार सरकारी नौकरी करने वाले कर रहे हैं, परेशानी जनता भुगत रही है। पूरे देश में ऐसा हो रहा है, लेकिन इस पर अंकुश लगाने की कोशिश कोई नहीं कर रहा है, सभी को पैसा चाहिए। इस कोरोना काल ने लोगों की माली हालत खराब करके रख दी है। अब जन-जीवन जैसे-तैसे पटरी पर आ रहा है तो रिश्वतखोरों ने अपनी रिश्वत की काली कमाई का कमीशन फिर बढ़ा दिया है और किसी की कोई बात नहीं सुन रहे हैं। अभी ताजा मामला इंदौर की रेत मंडी का ही सामने आया है। यहां पुलिस रेत लेकर आ रहे ट्रक वालों से एंट्री के नाम पर 3 से 10 हजार रुपये मांग रही है। हर बार शर्मसार और दागदार हो रही खाकी पहनने वालों ने ईमानदारी को बईमानी की खुटी पर ही टांग कर रख दिया है। रेत व्यापारियों की शिकायत भी सही है कि जिस तरह ओवरलोड वाहनों पर पुलिस प्रशासन कार्रवाई करता है, ऐसी ही कार्रवाई खदानों पर की जाए, चेकिंग के नाम पर लूट मचा रखी है। व्यापारी अगर कह रहे हैं कि गुजरात के पैटर्न पर मप्र में काम किया जाना चाहिए। इसका असर ये होगा कि माल भी सस्ता मिलेगा और इसका फायदा लोगों को ही होगा। अफसोस मध्यप्रदेश में कोई किसी की सुनने वाला नहीं है। पुलिसवालों से अकेले रेत मंडी से जुड़े वाहन मालिक ही नहीं है, दुकानदार, व्यापारी, ठेलेवाले सहित हर वर्ग परेशान है। 


अब इस खबर पर हम बात करते हैं....
लोकपाल को वर्ष 2019-20 के दौरान भ्रष्टाचार की 1427 शिकायतें मिली। इसमें से 613 सरकारी अधिकारियों से संबंधित थीं। वहीं, चार केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों के खिलाफ थी। 245 शिकायतें केंद्रीय अधिकारियों, 2008 पीएयू, न्यायिक संस्थानों और 135 निजी संस्थानों, व्यक्तियों के खिलाफ थी।