ये रिश्ता क्या कहलाता है....!


जगजीत सिंह भाटिया
प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र


विदेशी संस्कृति को जिस तरह से भारतीय लोगों ने अपनाया, उसके दुष्परिणाम ही सामने आ रहे हैं। विदेशी भारतीय संस्कृति को अपनाकर हरे रामा..., हरे कृष्णा करने लग गए हैं, लेकिन  हमारे देश की युवा पीढ़ी सुधरने को तैयार नहीं है। एक उदाहरण हमारे सामने दिन-रात दिखाई और सुनाई पड़ रहा है। सुशांत सिंह राजपूत हत्या/आत्महत्या में युवा पीढ़ी के लिए एक संदेश भी है। कि बिना वैधानिक रूप से विवाह किए संदिग्धों के साथ लिव इन में रहना कितना खतरनाक हो सकता है। 


यहां यह बात तार्किक है कि एक होनहार कलाकार का जीवन एक थर्ड ग्रेड लड़की की वजह से बर्बाद हो गया। ठीक इसके उलटा भी हम सोच सकते हैं कि लिव के मामले में लगभग लड़कियों को ही धोखा मिलता है और वह पूरे समाज और परिवार के सामने जीवनभर मुंह दिखाने लायक नहीं रहती। सुशांत सिंह राजपूत के केस से समाज को शिक्षा मिलती है कि खासकर उन भटके हुए युवाओं को जो लिव इन में रहकर समाज को बिगाड़ रहे हैं, इस रिश्ते का कोई नाम नहीं है।


विदेशी संस्कृति के आदी हो चुके युवाओं को ये जान लेना चाहिए कि हमारे देश में जो समाज रूपी संस्था है, और जिसके अंतर्गत रहकर विवाह बंधन तय होते है, उसे पूरे समाज में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। छोटे-मोटे विवाद अगर घर में होते हैं तो बड़े-बुजुर्ग पति-पत्नी को समझाते रहते हैं और हंसी-खुशी परिवार रहते हैं। लेकिन लिव इन के मामले में अक्सर देखा गया है कि विवाद के बाद या तो हत्या या फिर आत्महत्या वाले कदम युवक-युवतियां उठा लेते हैं। परिवारजन भी मान लेते हैं कि कम से कम बदनामी से छुटकारा तो मिला। 


सूशांतसिंह मामले में जो भी दोषी होगा, उसे कानून सजा देगा, लेकिन जांच में ये तो खुलासा हो गया कि रिया सुशांत के लिए ड्रग्स मंगाती थी।युवाओं को अपने परिजनों की मर्जी से शादी जैसे पवित्र रिश्तों में विश्वास रखना चाहिए, न कि पाश्चात्य संस्कृति में।