हंस ट्रेवल्स नहीं मान रहा कोविड-19 के नियम



  • सवारियों की नहीं हो रही थर्मल स्क्रीनिंग

  • हाथ साफ करने के लिए सेनेटाइजर भी नहीं दे रहे

  • बसों पर कोरोना से बचने का सिर्फ टेग लगाया


जवाबदेही@ इंदौर


करीब छह माह से पूरे प्रदेश में बसें बंद थी। लॉकडाउन से लेकर अब तक का टैक्स माफ करने की मांग   बस संचालकों ने की, जिसे प्रदेश के मुखिया शिवराजसिंह ने स्वीकार किया और टैक्स माफी की शर्त के साथ बसों के थमे पहियों ने रफ्तार पकड़ी और लोग अपने रुके हुए काम निपटाने सहित तमाम रिश्तेदारों से मिलने-जुलने बसों से आने-जाने लगे। बड़े ट्रेवल्स वाले कोरोना को लेकर जागरूकता की बातें तो बहुत करते हैं, लेकिन असल में ये बातें दो मुंही हो रही है। सरकार और जांचकर्ताओं को दिखाने के लिए बस चालकों ने आॅनलाइन सिस्टम तैयार किया है। सोशल डिस्टेंसिंग के तहत सवारियों को बसों में बैठाना तय किया गया है, लेकिन हंस ट्रेवल्स वाले नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। जवाबदेही को इस परिवार ने अपनी पीड़ा बताई कि किस तरह उन्हें ग्वालियर से इंदौर तक आना पड़ा।


ऐसा ही एक मामला मूसाखेड़ी में रहने वाले परिवार के साथ हुआ। ग्वालियर से इंदौर आने के लिए परिवार ने हंस ट्रेवल्स से 7 सितंबर को तीन टिकट बुक किए थे। 8 सितंबर को परिवार ग्वालियर स्थित सूर्वे साब का बाड़ा स्थित बस स्टैंड पर पहुंचा और वहां हंस ट्रेवल्स की बस में सवार हो गया। उस समय परिवार अचंभित रह गया, क्योंकि यहां कोविड-19 से बचने के लिए जो सरकार ने नियम बनाए हैं, उसका किसी भी तरह से पालन नहीं किया जा रहा था। सिर्फ टेग लगाया गया है, लेकिन नियम नहीं माने जा रहे हैं। परिवार में तीन सदस्य थे, हिसाब से सीट नं. 5, 11 और12 नंबर की दी गई थी और 6 नंबर की सीट को उसी वक्त ब्लॉक कर दिया गया था।


टिकट की दर प्रति व्यक्ति 650 रुपये और जीएसटी 33 रुपये के मान से लिया गया। इस हिसाब से तीन टिकट के 2049 रुपये लिए गए। बस जब ग्वालियर से रवाना हुई तो 6 नंबर सीट पर कोई नहीं बैठा था, लेकिन रास्ते में परिचालक ने बस रोकी और 6 नंबर की सीट पर एक यात्री को बैठा दिया। जब इस बात का विरोध किया गया तो बस परिचालक का कहना था कि सीट खाली थोड़ी रखेंगे। जब परिचालक को बस में बताया गया कि जैसे ही हमने तीन सीट बुक की थी तो 6 नंबर की सीट ब्लॉक कर दी गई थी, कि इस पर कोई नहीं बैठेगा, तो फिर बिना बुकिंग के आप कैसे किसी को भी बैठा रहे हों, वो भी बिना उसकी जांच किए और बिना सेनिटाइजर किए तो, कोई बात नहीं सुनी। 


लापरवाही


बस में बैठने से पहले न तो किसी यात्री की थर्मल स्क्रीनिंग की गई और न ही सैनेटाइज से हाथ साफ करवाए गए। लोग खुद की सुरक्षा और अपने परिवार की सुरक्षा की खातिर महंगा टिकट खरीदकर यात्रा कर रहे हैं, लेकिन बस संचालकों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने सरकार से अपनी मांगें मनवा ली और अब फिर से पुराने ढर्रे पर आ गए हैं।


आरटीओ की आंख में झोंक रहे धूल


निजी बस संचालक आरटीओ की आंख में धूल झोंककर यात्रियों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। जब ये पता है कि सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी है तो फिर क्यों यात्रियों को पास-पास बैठाया जा रहा है। बस चालकों को सिर्फ अपनी कमाई से मतलब रह गया है। लोगों की जान खतरे में पड़े, उसकी कोई चिंता नहीं है। 


अपील


लोगों से अपील है कि किसी ट्रैवल्स की बसों में सफर करें तो टिकट बुक करते समर्यं कोविड-19 को लेकर जो नियम तय किए हैं, वह बस में यात्रा करते समय लागू की गई है, उसका पालन हो रहा है या नहीं...।