ये भीड़ कुछ अलग ‘संदेश’ दे रही है....!


जगजीत सिंह भाटिया
प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र


इंदौर के खजराना के बड़ला इलाके में 30 अगस्त को पांच ताजिये निकाले गए और पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन को कानोकान खबर नहीं लगी, इस तरह का कोई आयोजन होने वाला है। कोरोना गाइड लाइन का मजाक उड़ाकर मुस्लिमजनों ने फिर उनके ही समाज को कलंकित करने का काम किया।


खजराना में अचानक से इतनी भीड़ का इकट्ठा होना संभव नहीं है..., और मातमी नारों के दौरान कानून को नहीं मानने वाली हंसी इन लोगों को चेहरे पर दिखाई दे रही है। वीडियो जो वायरल हो रहे हैं, उससे ये साबित हो रहा है कि ये भीड़ कुछ अलग ‘संदेश’ देना चाह रही है। इसे लेकर पूर्व महापौर और विधायक मालिनी गौड़ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। गौड ने लिखा है कि रविवार की घटना को संयोग नहीं, बल्कि भय फैलाने की साजिश थी।



इंदौर में इस प्रकार की घटना होने पूरे शहर के लिए खतरनाक है। इससे यह बात पता चलती है कि यहां का इंटेलीजेंस पूरी तरह से फेल है। इस प्रकार की घटना के लिए पुलिस-प्रशासन के साथ ही अन्य जिम्मेदार लोग भी दोषी हैं। पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होने के साथ ही दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इस मामले में अफसरों ने टीआई संतोष सिंह यादव को जिम्मेदार मानते हुए लाइन अटैच कर दिया है। दूसरी पांच ताजिए निकलवाने के मामले में वर्तमान पार्षद उस्मान पटेल, पूर्व पार्षद यूनुस पटेल, कुदरत पटेल, अंसार पटेल और शाहिद कुरैशी सहित अन्य 16 पर खजराना थाने में 4 मुकदमे में दर्ज हुए है। आरोपियों पर धारा 188, 269 और 270 लगाई है। वही पुलिस वीडियो की जाँच कर अन्य लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ भी प्रकरण दर्ज करेगी। प्रशासन को  टाटपट्टी बाखल की घटना से अलर्ट रहना चाहिए था। प्रशासन को इन लोगों ने चेतावनी दी है, कि ये लोग किसी भी कानून को नहीं मानते। कुछ दिन पहले बैंगलुरू में मुस्लिमों ने दंगा-फसाद कर वाहनों में आग लगाकर डर फैलाया था, कारण सोश्यल मीडिया पर वायरल संदेश बताया गया। अभी हाल ही में स्वीडन में दक्षिणपंथी प्रदर्शनकारियों की ओर से कुरान जलाने से भड़के दंगों की आंच नार्वे तक पहुंची है। एक बहाना ढूंढकर जान-माल का नुकसान करने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ती जा रही है। 


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