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स्मार्ट होते इंदौर के सामने कई चुनौतियां


जगजीत सिंह भाटिया
प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र


स्मार्ट शहरों में शुमार इंदौर शहर के सामने कई चुनौतियां हैं। भले ही प्रशासनिक अधिकारियों ने बारिश के दौरान रातभर मैदान संभाला और स्थिति बिगड़ने नहीं दी, वह काबिलेतारीफ है, लेकिन जो हालात बने, उसके कारणों का हल निकालना अब बहुत जरूरी हो गया है।


स्मार्ट सिटी के परवान चढ़ रहा हमारा इंदौर एक दिन की बारिश झेलने लायक नहीं है। इस बारिश ने हकीकत बयां कर दी है कि किस तरह से काम किए जा रहे हैं। एमआर-10 की हालत दरिया जैसी बन गई थी। चौराहों पर तालाब जैसे हालात। अभी भी कई जगह जल-जमाव की स्थिति है। बारिश अगर रुकती नहीं तो हालात और भी बदतर हो जाते। जिस तरह का जलजमाव देखा गया, उससे तो कतई नहीं लगता कि शहर का ड्रेनेज सिस्टम ठीक है। नगर निगम का रवैया आज भी वैसा ही, जब काम करना होता है, तब नहीं किया जाता। शहर में लगातार ड्रेनेज लाइनों को साफ करना चाहिए। हर हफ्ते इसकी मॉनिटरिंग होनी चाहिए। अभी हालात ये है कि जब शिकायत होगी,  तब उस जगह के चैंबर साफ किए जाएंगे। बिजली कंपनी का भी ऐसा ही रवैया है। शिकायत पर मेंटेनेंस करते हैं, जबकि पूरे साल बिजली की लाइनों का मेंटेनेंस किया जाना चाहिए। सफाई व्यवस्था ने गति पकड़ ली है, और लोग जागरूक हो गए हैं, उसी का परिणाम है कि शहर में गंदगी नजर नहीं आती। बारिश के दौरान शहर में जलजमाव के हालात क्यों बन रहे है, इस पर योजना बनानी चाहिए।


वर्तमान हालात ये है कि स्थानीय प्रशासन विकास के कार्यों पर अधिक ध्यान दे रहा है। जिस तरह आप राजबाड़ा कौ सौंदर्यीकरण कर रहे हो, छत्रीबाग सहित तमाम क्षेत्रों को आपने विकसित किया, ठीक उसी तरह शहर के ड्रेनेज सिस्टम पर भी ध्यान दो। लोग शिकायत कर रहे हैं कि नालियां साफ नहीं होती, चैंबर साफ नहीं होते, जिसके कारण बारिश में जलजमाव के हालात देखने पड़े। इस बात में कहीं तो सच्चाई होगी।


प्रमुख सड़कों के किनारे बारिश का पानी निकालने के लिए करीब एक फीट तक की जगह छोड़ी गई हैं और उस पर जालियां लगा दी है। इन्हें लगातार साफ किया जाना चाहिए। विजयनगर क्षेत्र के एमआर टेन पर इन जालियों के सामने मिट्टी भरी पड़ी थी, जिस वजह से सड़क का पानी व्यवस्थित तरीके से सीवरेज में नहीं जा सका और सड़क पर पानी जमा होता गया, ऐसे हालात बीआरटीएस के भी हैं। यहां तो अच्छी-खासी चौड़ी जालियां सड़क के किनारे लगा दी गई है,लेकिन सफाई लगातार नहीं होती, जिसकी वजह से बारिश का पानी सड़क पर ही रहता है। सड़क किनारे जो पाइप डाले गए हैं, क्या उनकी इतनी क्षमता नहीं है कि उसमें से बारिश का पानी आसानी से निकल जाए। इसकी जांच करानी चाहिए, क्योंकि जब करोेड़ों खर्च करने के बाद भी अगर बीआरटीएस पर पानी जमा हो रहा है तो कहीं न कहीं गड़बड़ी जरूर है। स्मार्ट शहर का सपना तो देख तो रहे हो, लेकिन सपने को हकीकत में बदलने के लिए कई चुनौतियों से निपटना अभी बाकी है।