कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक ‘ये सब’ एक है!


जगजीत सिंह भाटिया
प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र



जिस तरह हम कहते आए हैं कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक भारत एक है। उसी तरह रिश्वतखोर भी कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक एक जैसे हैं। चाहे किसी भी राज्य की बात करो, सभी जगह ये दीमकनुमा कीड़े देश को खोखला करते जा रहे हैं। अभी गत सप्ताह मध्यप्रदेश के धार जिले में मंडी के बाहर पड़ा लाखों टन गेहूं सड़ गया, जिसे कौड़ियों के भाव बेचा गया। लाखों रुपये के गेहूं के ये हालात कर दिए सरकारी अफसरों ने। जो गेहूं लोगों का निवाला बनना था, उसे सांठ-गांठ के चलते बारिश में खराब करवा दिया और औने-पौैने दामों में उसे बेच दिया गया। इसी तरह हरियाणा के मलियाना स्थित खाद्य गोदाम में कई फीट बारिश का पानी बर गया और सरकारी राशन खराब हो गया।


यहां 21 जुलाई से राशन का वितरण होना था, जो नहीं हो सका। इस तरह के हालात पूरे देश में है। हर जगह भ्रष्टाचार करने वालों की तूती बोलती है। जब पता है कि लाखों टन गेहूं पैदा होता है तो व्यवस्था करने के लिए अगले साल से करेंगे व्यवस्था की बात कही जाती है, लेकिन नतीजा फिर गेहूं को खराब कर दिया जाता है। ऐसा वर्षों से चला आ रहा है, लेकिन जानबूझकर ध्यान नहीं दिया जाता। इस खराब गेहूं में से लगभग 40 प्रतिशत गेहूं अच्छा निकल जाता है, जिसे आटा-मैदा बनाने वाली मिलों को 15 रुपए किलो में बेचा जाता है और खराब गेहूं 3 से 4 रुपए किलो में जानवरों के लिए  खाना  और प्रोटीन बनाने वाली कंपनियों को बेच दिया जाता है। इसके अलावा 14 से 20 रुपये किलो में खराब ज्वार, मक्का, बाजरा और चावल शराब बनाने वाली फैक्टरियां खरीदती हैं, जिससे कि शराब बनाई जाती है। फिर सरकारी गोदामों से सड़ा हुआ अनाज इतनी कम कीमतों में क्यों बेचा जाता है और इस जालसाजी में कौन-कौन मिला होता है, ये भी जांच का विषय है। रिश्वतखोरों और भ्रष्टाचारियों ने देश की सुख-शांति छीन ली है। इसी का नतीजा है कि ये भ्रष्टाचारी दीमकनुमा कीड़े दिन-पर-दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। अभी एक राजस्थान में रिश्वत लेने का मामला सामने आया।


यहां एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) टीम ने बुधवार आधी रात को 12 बजे बड़ी कार्रवाई करते हुए रामगंजमंडी नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी पंकज कुमार मंगल को एक लाख रूपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। घूसखोर आरोपी एसीबी टीम को पीछा करते देखकर दरवाजा अंदर से बंदकर अपने घर में छिप गया। वहां मौजूद अपने साथी भवानी सिंह की मदद से आनन-फानन में रिश्वत में प्राप्त नोट गैस स्टोव पर जला दिए। इंद्रप्रस्थ कॉलोनी में रहने वाले अखिलेश गर्ग ने 16 जुलाई को शिकायत दी थी। इसमें उन्होंने कहा था कि बाजार नंबर एक एएसआई कंपनी के सामने रामगंजमंडी में उनकी पत्नी के नाम एक भूखंड है। उसमें निर्माण की स्वीकृति के एवज में नगर पालिका अध्यक्ष हेमलता शर्मा का पुत्र सौरभ शर्मा और नगर पालिका अधिशासी अधिकारी पंकज कुमार उनसे 4 लाख की रिश्वत मांग रहे हैं।


शिकायत में ये भी कहा कि नपा अध्यक्ष का बेटा पहले डेढ़ लाख रुपये भी ले चुका है। पैसा मिलने के बाद उनके मकान की निर्माण स्वीकृति जारी की जा चुकी थी, लेकिन इसके बाद नगर पालिका के अधिशाषी अभियंता पंकज कुमार मंगल द्वारा रिश्वत के बाकी रुपए प्राप्त करने के लिए दबाव बना रहे हैं और मकान के निर्माण कार्य पर लाल निशान लगाकर निर्माण काम को रुकवा दिया। एसीबी ने जांच की तो मामला सही निकला। जम्मू-कश्मीर को लेकर मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम का ये कहना कि यहां के भ्रष्टाचार पर लिखूं तो किताब बेस्ट सेलर होगी। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को लेकर कहा है कि यहां किसी नियम का पालन नहीं हो रहा था, उन्होंने देश में कई जगह काम किया, लेकिन इतनी गंदगी कहीं नहीं देखी। यहां की सरकारों ने अपनों को ही फायदा पहुंचाया। 10 सालों से यहां साढ़े छह हजार करोड़ रुपये के विकास के प्रोजेक्ट अटके पड़े हैं। आज हम देखते हैं कि कई ऐसे विद्यार्थी दिन-रात मेहनत करके लोकसेवा आयोग की परीक्षा पास करते हैं, लेकिन जब वह फील्ड में पहुंचते हैं तो उनके सामने कई चुनौतियां होती है। सबसे बड़ी भ्रष्टाचार से निपटने की। कुछ अफसर इन चुनौतियों से लड़ते हुए सिस्टम का ही हिस्सा बन जाते हैं, क्योंकि शुरू में तो इनके आचार-विचार ईमानदारी और देशभावनावाले होते हैं, लेकिन जैसे-जैसे ‘अनुभव’ होता जाता है, साहब के तेवर ही बदल जाते हैं, क्योंकि सरकारी तंत्र भ्रष्टाचाररूपी दल-दल है, इसमें रहकर उंगलियों पर गिने जाने वाले ईमानदार अफसर ही अपना दामन साफ रख पाते हैं, जिनका जीवनभर तबादला ही होता रहता है।