स्वास्थ्य विभाग पर उठते सवाल?


जगजीत सिंह भाटिया
प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र



अनुमति एडीएम इंदौर को पत्र लिख मांगी...


एडीएम बोल रहे मुझे जानकारी नहीं?



एक तरफ स्वास्थ्य विभाग लोगों की सेवा करने का ढिंढोरा पिटवाकर स्वागत सत्कार करवा रहा है। दूसरी ओर इसी विभाग की लापरवाही की खबरें सामने आ रही है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी इलाज तो कर रहे हैं, लेकिन लोगों से अभद्रतापूर्वक व्यवहार कर रहे हैं। पहला मामला व्यापमं घोटाले में विसल ब्लोअर रहे डॉ. आनंद राय के गनमैन का है। गनमेन ने जागरूकता दिखाई और स्वास्थ्य अमले को फोन लगाया कि वह घर आकर जांच कर ले तो सीएमएचओ का अमला उनके घर पहुंचा और अभद्रता कर कहने लगा कि तुम क्या वीआईपी हो, जो कॉल कर बुला लिया। इसके बाद अमला पूूरे परिवार को एंबुलेंस में बैठाकर अरबिंदों अस्पताल ले जाने लगा। गनमैन ने विनती की कि बच्चों को मत ले जाओ, क्योंकि उनमें लक्षण नहीं है। यह भी कहा कि उन्होंने बच्चों को दूर ही रखा था, लेकिन उन्होंने कोई बात नहीं सुनी और पूरे परिवार को एंबुलेंस में बैठा दिया। जबकि माता-पिता दोनों ही पॉजिटिव थे। दंपती बच्चों को देख रोते रहे और दोनों को दूर रखा। (यहां अमले की मानवीय संवेदना नजर नहीं आई)


स्वास्थ्य विभाग की दूसरी लापरवाही का बड़ा मामला फिर सामने आया। शैल्बी अस्पताल जो काफी बदनाम हो चुका है, उसमें सांठगांठ करके संक्रमित लोगों की लाशें शहर से बाहर जा रही है। 


शैल्बी अस्पताल में इलाजरत एक मरीज का शव सनावद तक पहुंच गया जिससे वहां हड़कम्प मच गया। स्थानीय प्रशासन ने वहां के आजादनगर इलाके को सील कर 32 परिजनों को क्वारन्टीन किया है। मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में हड़कम्प मचा हुआ है। जानकारी के अनुसार 23 मई को सनावद से सईद अहमद पिता अब्दुल नासिर पटेल 54 वर्ष, को इलाज के लिए परिजन शैल्बी हॉस्पिटल लेकर पहुंचे थे। यहां सईद की 26 मई को मौत हो गई। परिजन शव को लेकर सनावद के आजाद नगर स्थित घर करीब ढाई बजे पहुंच गए। वाहन (एमपी 09 सीई 3052) से शव को ले जाया गया। यहां अंतिम संस्कार की तैयारी की गई। संदिग्ध व पॉजिटिव मरीजों के लिए बने नियमों को ताक पर रखकर शव को नहलाया गया और फिर कब्रिस्तान ले जाया गया। जबकि कलेक्टर मनीष सिंह 9 अप्रैल को इस संबंध में आदेश जारी कर चुके हैं की कोई भी शव अस्पताल से घर नहीं जाएगा न जिले के बाहर जाएगा। उसे सीधे इंदौर के ही मुक्तिधाम या कब्रिस्तान ले जाना होगा। अंतिम संस्कार में भी 5 से अधिक लोगों के शामिल नहीं होने की बात कही गई। लेकिन सईद के रसूखदार परिजनों ने इस आदेश को हवा कर दिया। 


मिली जानकारी के अनुसार सईद के दो भाई पुलिस में है, एक प्रशासनिक अधिकारी है तथा पूरा परिवार रसूखदार है।  स्थानीय सूत्रों ने बताया कि सईद को इंदौर लाने से पूर्व सनावद में डॉक्टर राहुल अग्रवाल ने उनका इलाज किया था। वह भी पॉजिटिव निकले हैं और उनके चार सहयोगी भी पॉजिटिव निकले हैं। जिसके बाद उनका भी इलाज किया जा रहा है और संबंधित लोगों को क्वॉरेंटाइन किया गया है।


सूचना मिली तो मच गया हड़कम्प


सनावद एसडीएम मिलिंद ढोके से जब हमने इस संबंध में बात की तो उन्होंने बताया कि शेल्बी अस्पताल प्रबंधन द्वारा स्वास्थ विभाग को 27 मई को सूचित किया गया था कि उक्त व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव था। जिसकी मौत हुई है। जानकारी मिलने के बाद हमने 32 परिजनों को व मिलने जुलने वालों को क्वॉरेंटाइन किया है और जिन्हें लक्षण दिखे हैं उनके सैंपल भी लिए हैं। सभी पर नजर रखी जा रही है किसी में भी लक्षण दिखते हैं तो उनका इलाज करवाया जाएगा। 


उधर परिजनों ने एक अनुमति भी अधिकारियों को जारी की है जिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्योंकि अनुमति डॉ. जुबेर पटेल ने एडीएम इंदौर को पत्र लिख मांगी थी जिसपर एडीएम पवन जैन का नम्बर लिखा है। हमने जब उनसे बात की तो बोले मुझे इसकी जानकारी नहीं है। वहीं अनुमति लेने वाले डॉ. जुबेर पटेल का कहना है कि मेरे भाई वसीम ने अनुमति ली थी मुझे इसकी जानकारी नहीं है। जुबेर ने खुद को मृतक सईद का भतीजा बताया है। ऐसे में अनुमति की जांच कर अगर यह फर्जी है तो संबंधितों पर प्रकरण दर्ज होना चाहिए।


क्या रसूखदारों के कारण नियमों को तोड़ोगे


दोनों मामलों में अंतर देखिए। एक सामान्य व्यक्ति जो अपने बच्चों के लिए गुहार लगा रहा है कि बच्चों में कोई संक्रमण के लक्षण नहीं दिखाई दे रहे हैं, तो भी स्वास्थ्य अमला मान नहीं रहा। वहीं दूसरा मामले में स्वास्थ्य विभाग से ही जुड़े लोग संक्रमित मरीज की मौत के बाद नियमों की धज्जियां उड़ाकर उसके परिजन को सहायता कर रहे हैं, क्योंकि ये मामला रसूखदार परिवार से जुड़ा है। 


 


जवाबदेही अपील
घर में रहे, सुरक्षित रहे, एक-दूसरे से दूरी बनाकर रहे, बाजारों में सामान खरीदने के लिए भीड़ न लगाएं, प्रशासन के नियमों का पालन करें