‘हम भारतीय’


जगजीत सिंह भाटिया
प्रधान संपादक
जवाबदेही समाचार पत्र



चीन और हमारे देश की कुंडली शुरू से ही बिगड़ी हुई है और लगभग ‘36’ का आंकड़ा हो गया है। वर्तमान कारण ये है कि चीन के सैनिकों ने हमारे सैनिकों पर हमला किया और हमारी सीमा में घुस आए। अब हमारे देश के लोग चीनी सामान का बहिष्कार कर सामान जला रहे हैं और संकल्प ले रहे हैं कि चीनी सामान का उपयोग नहीं करेंगे..., परंतु इसके लिए क्या किसी ने कोई तैयारी की। हमारे यहां विरोध करने की परिभाषा कुछ अलग है..., जिसे राजनीतिक दृष्टि ही देखा जा सकता है। क्योंकि प्रदर्शनकारी लगभग नेता या कोई संगठन ही दिखाई पड़ता है..., व्यापारी और आम आदमी कभी विरोध करता दिखाई नहीं देता। कारण है...., आम आदमी को रोजगार चाहिए और व्यापारी को अपने व्यापार से मतलब..., आप विरोध करते रहो कोई फर्क नहीं पड़ता...। हम इंदौर शहर की ही बात करते हैं। चीनी सामान का विरोध यहां भी बरसों से हो रहा है, लेकिन खरीदी चीन के सामान की लगातार जारी है। इंदौर में कुछ कथित व्यापारी जेल रोड पर और महारानी रोड पर चाइना का ही माल बेच रहे हैं, लेकिन लेबल ‘‘मेड इन इंडिया’’। ये वो लोग है, जो बरसों से इस धंधे में लगे हुए हैं। उन्हें पता है कि हमारा भारतीय व्यक्ति बहुत भावुक है, उसे कैसा ठगा जा सकता है। ये वह जान गए है कि ग्राहक आकर अब चीनी सामान नहीं मांगता, भारत में बनी वस्तुएं उसे चाहिए...., तो इसका तोड़ उन्होंने निकाला है। आप लाख जतन कर लो... आपको वस्तु चीनी ही मिलेगी, खासकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण। बरसों से हमारे देश में चीनी सामान का विरोध हो रहा है, लेकिन क्या किसी ने सस्ता इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने की ओर ध्यान दिया नहीं..., ‘कोई सस्ता नमकीन बना रहा है तो कोई 10 रुपए में तीन कचोरी-समोसे बेच रहा है। कोई पापड़ बना रहा तो कोई बड़ी बनाकर घर-घर जाकर बेच रहा है तो कोई अगरबत्ती बना रहा है।’ उद्देश्य से भटक गए हैं लोग। ये छोटे-छोटे काम आपकी आजीविका के लिए तो हो सकते हैं, लेकिन देश की तरक्की के लिए कभी भी सार्थक नहीं हो सकते, क्योंकि इन कामों से आप घर तो चला सकते हो, लेकिन जब मोबाइल, सीम, चीफ, बल्ब, सीरीज आदि उपकरण खरीदने जाओगे तो भारत की बनी हुई वस्तुओं की बजाए चीन की सस्ती वस्तुएं घर खरीदकर लाओगे। अभी कुछ दिनों बाद दीवाली आएगी..., एक आदमी इंदौर की बनी हुई झालर नहीं खरीदेगा..., क्यों? क्योंकि उसकी क्षमता ही नहीं है कि वो भारत में बनी थोड़ी महंगी ‘रोशनी’ खरीदे। कारण भी स्पष्ट है कि हमारे देश के व्यक्ति ने कभी कुछ बड़ा करने की सोची ही नहीं, वह अचार-पापड़ और कचोरी-समोसे बनाने में ही व्यस्त रहा। इसके लिए जिम्मेदार सरकारी अफसर भी है, जिनका पेट कभी भी ईमानदारी की रोटी खाकर नहीं भरा। अगर कोई हिम्मत भी कर ले कि कोई छोटा उद्योग स्थापित कर ले तो उस व्यक्ति को ऐड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ जाता है। तमाम सरकारी नियमों की बाधाएं उस व्यापारी के उद्योग के विकास में बाधाएं बनती है। अगर जैसे-तैसे व्यापारी ईमानदारी से पूरी कवायद भी कर ले तो भी उसे काम शुरू करने के लिए रिश्वत तो देना ही पड़ती है, तब जाकर व्यापार उसका चल सकता है। ऐसे हालात है हमारे देश के। अगर देश को हकीकत में आत्मनिर्भर बनाना है तो पहले हमारे देश के ही नागरिकों को संकल्प लेना होगा कि वो न तो रिश्वत देंगे और न ही लेंगे। अगर आपको कोई छोटा उद्योग लगाना है और कोई अफसर-कर्मचारी रिश्वत मांग रहा है तो उस व्यक्ति का सार्वजनिक रूप से अपमान करो और उसे ये अहसास कराओ कि हम भारतीय है..., जब हम घर में ही कालाबाजारी करेंगे तो चीन से कैसी टक्कर ले सकेंगे...., शायद रिश्वतखोरों को अपने भारतीय होने पर शर्म आ जाए...