बर्बादी की ओर जा रही युवा पीढ़ी


जगजीतसिंह भाटिया
प्रधान संपादक



शहरी जीवन और उसकी चकाचौंध युवाओं को संस्कारों से दूर करती जा रही है। युवा मान-मर्यादाओं को भूल चुके हैं। उन्हें बड़े-बुजुर्गों की कोई परवाह नहीं है। बड़े अरमानों से बच्चों को शहरों में पढ़ने के लिए भेजने वाले मां-बाप की पीठ के पीछे बच्चे क्या गुल खिला रहे हैं, ये मां-बाप को नहीं पता। वहीं, बच्चे उनके अरमानों पर पानी फेरने का पूरा इंतजाम कर चुके हैं।
इंदौर में युवाओं को एकांत चाहिए। वो ऐसी जगह चुन रहे हैं, जहां उनकी अश्लील हरकतों को रोक-टोक करने वाला कोई नहीं हो। कैफे, होटलों, गार्डन, मंदिरों में वो एक-दूसरे से लिपटकर बैठने लग गए हैं। सार्वजनिक जगहों पर उनका आलिंगन करना मामूली बात हो गई है। पढ़ाई के दौैरान युवक-युवतियां वो सब कर रहे हैं, जो शादी के बाद करना चाहिए, जिससे गर्भपात के मामले भी बढ़ गए हैं। ऐशो-आराम का जीवन जीने के लिए लड़कियां खुद की इज्जत तो दांव पर लगा रही है, मां-बाप के सपनों को भी पूरा नहीं कर पा रही। इंदौर में खंडवा, बुरहानपुर, धार, नीमच, रतलाम, झाबुआ सहित तमाम ग्रामीण क्षेत्रों से युवक-युवतियां पढ़ने के लिए आ रहे हैं। यहां होस्टल में रहकर वो पढ़ाई कर रहे हैं। लेकिन पढ़ाई के नाम पर युवाओं ने प्रेम लीला शुरू कर दी है। उनके मां-बाप खाने से लेकर रहने और आने-जाने तक का खर्च उन्हें हर माह पहुंचा रहे हैं, लेकिन युवा सिगरेट, शराब के शौकीन हो गए हैं। लड़कियां भी लड़कों का बराबरी से साथ दे रही है। शहरी आबोहवा में रहकर ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियां ज्यादा बिगड़ रही है। वहीं बड़ा कारण कि इन युवाओं को यहां कोई नहीं पहचानता। चाहे जहां बैठकर अश्लील हरकत कर रहे हैं। बाहों में बाहें डालकर बैठ रहे हैं। एक-दूसरे के पैरों में पैर डालकर बैठ रहे हैं। उनके आस-पास बैठे सभ्य लोग अपनी नजरें नीची कर चुपचाप होटलों से बाहर निकल जाते हैं। अगर इन युवाओं को किसी ने रोका या टोका तो उसकी शामत आ गई। उसे कौन-से जमाने में रह रहे हो का लेक्चर तक सुनना पड़ रहा है। 
खर्चे बढ़ा लिए : लड़कियों ने शहर में रहकर खर्चे बढ़ा लिए। घर से सीमित पैसा आता है, लेकिन शहर के रहन-सहन जैसे पब में जाना, महंगी होटलों में भोजन करना, मॉल में घूमना-फिरना, मल्टी प्लैक्स में पिक्चर देखना, महंगे कपड़े, परफ्यूम, नशा करने के शौक पाल लिए हैं। शौक पूरा करने के लिए लड़कियां ब्वॉय फ्रैंड पालने लग गई है और लड़के लड़कियों की हर ख्वाहिश पूरा कर रहे हैं और बदले में लिव इन में रहने के लिए कहते हैं, जिसे लड़कियां सहर्ष स्वीकार कर रही हैं। इंदौर में किसी जमाने में राजबाड़ा क्षेत्र की ज्यूस की दुकानें बहुत बदनाम हुआ करती थी। यहां तलघर में छोटे-छोटे कैबिन बना रखे थे, जहां घंटे के हिसाब से युवा प्रेमियों से पैसे लिए जाते थे। अब ऐसा प्रचलन क्षेत्रीय कॉलोनियों में आइस्क्रीम पार्लरों पर होने लगा है। लोगों ने घरों पर दुकानें खोल ली है और छत पर छोटे-छोटे रूम बना दिए हैं, जहां युवाओं को पूरी छूट दी जा रही है। इन विकृतियों को रोकने के लिए मां-बाप का सजग रहना जरूरी है। क्योंकि वह पढ़ा रहे हैं, यहीं तक उनकी जिम्मेदारी नहीं है। पहले ही बहुत देर हो चुकी है यदि अभी भी पहल नहीं की तो फिर मात्र पछतावे और रोने के अलावा कुछ हाथ नहीं आएगा।