नाम, शौहरत और रुपयों की खातिर...‘लटकी’ फांसी...!


जगजीतसिंह भाटिया
प्रधान संपादक


दिल्ली में हुए निर्भया कांड के दोषियों को फांसी पर लटकते देखने इंतजार...., करते...करते देश थक चुका है, लेकिन इन अपराधियों को बचाने वाले ‘जल्लाद’ कानून से खिलवाड़ कर रहे हैं। फांसी की सजा अब दया याचिका और डेथ वारंट को चुनौती देने के कानूनी दांव-पेंच में उलझती नजर आ रही है। हाई कोर्ट की टिप्पणी - यह साफ है कि कैसे दोषियों की ओर से सिस्टम का दुरुपयोग किया गया, ऐसे में तो लोग सिस्टम से भरोसा खो देंगे।


कुल मिलाकर कानून के जानकारों ने अपराधियों को बचाने का ठेका ले रखा है। उनकी जिद ही है कि दोषी आज तक बचे हैं, जबकि पूरा देश जानता है कि किस तरह एक मासूम की जिंदगी से खिलवाड़ किया गया और हर आंख गुस्से में थी..और है। फिर भी इन दरिंदों को बचाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। वकील रुपयों और नाम की खातिर इन अपराधियों को  कानून की जानकारी देकर याचिकाएं लगवाकर इन्हें बचाने में लगे हुए हैं।


अपराधी अब डर नहीं रहे, प्रतिदिन कई बेटियां ऐसे अपराधियों के हाथों रौंदी जा रही है और लचर कानून की आड़ में अपराधी जेल में मुफ्त की रोटी तोड़ रहे हैं। देश में कई सनसनीखेज वारदातें हुई और कानून के आंख पर पट्टी लगी है और हाथ बंधे हुए हैं। लोगों का रोष खत्म करने के लिए  फास्ट ट्रैक कोर्ट में प्रकरण चला और सजा दी गई, लेकिन अपराधी आज भी जीवित है। ताजा मामला मकर संक्रांति का है। झारखंड के रांची स्थित खूटी के काला माटी में चार नाबालिग लड़कियों से सामूहिक दुष्कर्म की घटना गुरुवार को सामने आई। घटना बुधवार शाम की है। सभी 6 लड़कियां मकर संक्रांति पर रंग रोड़ी मेला देखकर वापस अपने घर फूंदी गांव लौट रही थीं।  घटना खूंटी जिले के हादूतामी गांव की है। लड़कियों की उम्र 12 से 15 साल के बीच की है और सभी पांचवीं-छठवीं कक्षा में पढ़ती हैं। पीड़िताओं ने बताया कि वह सभी मेला देखकर लौट रहीं थीं। रास्ते में तीन बाइकों पर सवार 6 लड़के आए और लड़कियों को ले गए। इनमें से एक आरोपी, लड़कियों के साथ ही पढ़ता है जबकि बाकियों की पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस ने पीड़िताओं से पूछताछ करने के बाद उन्हें मेडिकल के लिए भेजा है। 2018 में भी खूंटी के कोचांग इलाके में नाटक मंडली की 5 लड़कियों से गैंगरेप की घटना हुई थी। इसमें सात लोगों को अभियुक्त बनाया गया था। आरोपियों में कुछ पत्थरगढ़ी के समर्थक भी थे। लड़कियां कोचांग के स्टॉपमन मध्य विद्यालय में नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर रहीं थीं। 15 मिनट बाद दो बाइक पर सवार पांच लोग वहां पहुंचे। तीन युवक लड़कियों को बंदूक की नोक पर कार से बाहर ले गए और उनके साथ ज्यादती की।


कई माता-पिता आज भी कोर्ट की दहलीज पर जाकर अपराधियों को फांसी मिले उसके लिए गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अपराधियों को फांसी नहीं मिल रही । गुनहगार बच रहे हैं और पीड़ित दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।