मुख्यमंत्री नाथ के तजुर्बे भू-माफियाओं पर भारी


जगजीतसिंह भाटिया
प्रधान संपादक


मप्र के मुख्यमंत्री श्री कमलनाथजी ने अब अपना सही रूप दिखाया है, जो कि एक मंझे हुए नेता का होता है। उन्होंने माफियाओं के खिलाफ जो अपनी आंखें तरेरी है, उससे जनता के मन में सुकून तो हो चला है। वैसे कमलनाथ कई सालों से अलग-अलग पदों पर रहे हैं और उन्हें सब पता है कि किस जिले में कहां गड़बड़ी हो रही है। इसलिए उन्होंने कड़ा रूख अख्तियार किया है। उनके तजुर्बे का ही परिणाम है कि मध्यप्रदेश में माफियाओं में हड़कंप मचा है। इंदौर में कई भूमाफियाओं ने लोगों का रुपया हड़प लिया और उन्हें आशियाना तक नहीं दिया और दिया तो एक आवास चार-चार लोगों को बेचा हुआ। पीड़ित उनका कुछ नहीं बिगाड़ सके, क्योंकि इन भूमाफियाओं के रहनुमा भी शहर में मौजूद रहे हैं, जो इन्हें बरसों से बचाते आ रहे हैं। अब इस मुहिम में कुछ ऐसी बातें भी नजर आ रही है, जिसमें फर्क नजर आएगा और दिखाई भी दे रहा है। क्योंकि ऐसा नहीं है कि इंदौर जैसे शहर में कुछ अपराधिक प्रवृत्तियों वालों ने ही अवैध साम्राज्य खड़ा किया है, कुछ ऐसे भी सफेदपोश माफिया है जो कि कांग्रेस के नेताओं से जुड़े हुए हैं, उन्हें स्थानीय नेताओं द्वारा बचा लिया जाएगा। यदि मुख्यमंत्री चाहते हैं कि जनता में एक अच्छा संदेश जाए तो कार्रवाई निष्पक्ष होनी चाहिए। गुंडे और माफिया अपराधी ही होते हैं। वे किसी के सगे नहीं होते, जिसका राज होता है, उनके पूत बन जाते हैं। मीडिया में जिन भूमाफियाओं के नाम प्रकाशित किए हैं, उनमें कुछ सफेदपोश को छोड़ दिया गया है, क्योंकि वो किसी न किसी रूप से कांग्रेसी नेताओं से जुड़े हैं। इसके अलावा रिश्वतखोर अधिकारियों के खिलाफ भी एक बड़ी मुहिम चलाना चाहिए। क्योंकि आम जनता बहुत त्रस्त है। अधिकारी खुलेआम बोल रहे हैं कि इतना पैसा खर्च करके पोस्टिंग कराई है तो वसूल नहीं करेंगे। अभी खुड़ैल क्षेत्र की तहसीलदार पल्लवी पुराणिक के आॅफिस में 12 दिसंबर को जमकर हंगामा हुआ क्योंकि किसानों के नामांतरण, बटांकन, सीमांकन एवं ऋण पुस्तिकाओं से संबंधित कोई भी कार्रवाई बिना पैसे लिए नहीं की जा रही है और मांग भी लाखों रुपए की है। महीनों से प्रकरणों को लंबित रखा जा रहा है। आरआई पठान, पटवारी रामेश्वर उज्ज्वल, तहसीलदार का रीडर नरेंद्र एवं तहसीलदार महोदया पल्लवी पुराणिक की पूरी टीम गैंग आॅफ वासेपुर की तर्ज पर काम कर रही है। जब तक पैसे नहीं मिलते तब तक कागजों में कमी निकलती रहती है और प्रकरण लंबित रहते हैं। सुनवाई कहीं नहीं हो रही है। यह तो सिर्फ एक अधिकारी और एक विभाग की कहानी है, लगभग हर विभाग ज्यादातर अधिकारियों की ऐसी ही हालत है। पुलिस विभाग के बड़े अधिकारी अपने ही विभाग के छोटे अधिकारियों की साजिशों का शिकार हो रहे हैं, अधिकारी किसी बड़े पर कार्रवाई करने की प्लानिंग करते हैं तो छोटे उन माफियाओं को पहले ही सचेत कर रहे हैं।



प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शुद्ध के लिए युद्ध अभियान जो शुरू किया है, उसमें खाद्य विभाग की भूमिका का अहम रोल है ताकि जनता को शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध हो। और इसी विभाग के कुछ अफसर मुख्यमंत्री के अभियान में सेंध लगा रहे हैं। इसका एक उदाहरण धार जिले का है। धार में 2018 में संजीव मिश्रा खाद्य सुरक्षा अधिकारी थे, जो वर्तमान में नीमच में सेवाएं दे रहे हैं। इनकी गिनती महाभ्रष्ट अधिकारियों में आती है। संजीव मिश्रा का तात्कालीन कारनामा ये है कि  20.6.18 की शाम 4.00 बजे ये महोदय लाइसेंसी शराब दुकान जो कि बख्तावर मार्ग, इंदौर-अहमदाबाद मार्ग पर है, पर पहुंचे और बॉम्बे स्पेशल व्हिस्की  180 एमएल की 8 ग्लास बोतल (80 रु प्रति पैक मूल्य) खरीदी और नमूने के चार भाग बनाकर नियमानुसार संक्षिप्त पंचनामा बनाया। आश्चर्य की बात ये कि पूरे मध्यप्रदेश में आबकारी विभाग द्वारा ही देशी-विदेशी शराब दुकानों का संचालन किया जाता है, जिसमें एक वर्ष के लिए शराब दुकानों का आवंटन लायसेंसी को किया जाता है। इन दुकानों पर देशी एवं विदेशी मदिरा प्रदाय व्यवस्था भी शासन के माध्यम से आबकारी विभाग द्वारा की जाती है एवं दुकानों पर उपलब्ध मदिरा शासन द्वारा आबकारी विभाग के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में ही बेची एवं खरीदी जाती है, जिसकी समस्त जानकारी शासकीय वेयर हाऊस व जिला कार्यालय को होती है एवं जो डिस्टलरियों से  ऋछ को प्रदाय दिया जाता है वह भी आबकारी विभाग के अधीन ही होता है एवं लायसेंस की शर्तों एवं आबकारी नियमों में ऐसा कहीं भी उल्लेख नहीं है कि खाद्य विभाग से लायसेंस लेना अनिवार्य होगा। 


इसके बावजूद संजीव कुमार मिश्रा ने इस दुकान पर तीन घंटे तक बिक्री बंद करवाई, क्योंकि इनके द्वारा नाजायज मांग की जा रही थी। वहीं मामले में दिनांक 21 जून 2018 को आवेदक को समाचार पत्र पत्रिका के माध्यम से मालूम हुआ है कि इनके द्वारा जो बॉम्बे स्पेशल व्हिस्की का सैंपल दुकान से लिया गया है वह अमानक स्तर का बताया गया है, जबकि समस्त मध्यप्रदेश में विदेशी मदिरा दुकानों पर शराब सप्लाय व्यवस्था शासकीय गोदामों से (एफएल-10) के माध्यम से की जाती है और जिन फैक्टरियों में ये मदिरा बनती है वह भी आबकारी विभाग के अधीन ही आती है ऐसे में अब कार्यवाही विभाग के किस अधिकारी पर की जाएगी ये सोच का विषय। एक सरकारी विभाग में दूसरे सरकारी विभाग का दखलअंदाजी क्यों की गई? भ्रष्टाचार ही इसका एकमात्र कारण समझ में आता है। इसी मामले में संजीव कुमार मिश्रा ने मामले में दो प्रकरण चलवाए। पहला प्रकरण (चालान) जिला कोर्ट धार में 20.3.19 को पेश किया। इसी मामले में दूसरा प्रकरण (17-2019)  एडीएम कोर्ट धार में पेश किया, जिसका संबंधित लाइसेंसी दुकानदार को नोटिस आया। जब संजीव कुमार मिश्रा की नाजायज मांगों की पूर्ति नहीं की गई तो जानबूझकर शराब ठेकेदार को परेशान करने के लिए उक्त झूठा प्रकरण बनाकर पेश किए गए। उक्त शराब मिथ्याछाप है तो इसे बनाने वाली कंपनी हर साल लाखों पेटियां शराब पूरे मध्यप्रदेश में आबकारी विभाग के माध्यम से दुकानों पर आवंटित करती है, तो शराब कंपनी पर कार्रवाई होनी चाहिए, न कि लाइसेंसी ठेकेदार पर। 



अब एक और रिश्वतखोर की खबर पर नजर डालते हैं।  गत सप्ताह इंदौर लोकयुक्त पुलिस ने मंगलवार को बिजली विभाग के प्रभारी कार्यपालन यंत्री और उसके बाबू को रिश्वत लेते पकड़ा है। उन्होंने बिजली लोड बढ़ाने के नाम पर फरियादी से 25 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की थी। फरियादी अशोक कुमार सोनी की शिकायत पर लोकायुक्त की एक टीम ने डीई अजय व्यास और उनके बाबू प्रकाश शाह को रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ा। लोकायुक्त डीएसपी प्रवीण बघेल के अनुसार पश्चिम क्षेत्र में एक नया होटल खुला है, उसमें लोड बढ़ाने के लिए एक ट्रांसफॉर्मर शिफ्ट होना था। 11 किलो लोड बढ़ाने के लिए इन्होंने बिजली कनेक्शन करने वाली कंपनी के कर्मचारी के जरिए 25 रुपए हजार रिश्वत की मांग की थी।
आज मध्यप्रदेश के हालात ऐसे हो गए हैं कि बाप बड़ा न भैया, सबसे बड़ा रुपया।